अध्याय 5: द गिफ्ट
अपनी आँख के कोने से रोनाल्ड ने देखा कि एडलिन “नेब्युला’ज़ हार्ट” की तस्वीर पर ज़ूम इन-आउट कर रही है, और उसकी मुस्कान और फैल गई।
एडलिन के ऑफिस आने से पहले ही वह उसकी ग्रेजुएशन थीसिस झटपट पढ़ चुका था।
साफ था कि उसे क्लासिक ज्वेलरी की गहरी समझ है—हालाँकि ऐसे पीस ज़्यादातर सिर्फ तस्वीरों में ही देखे जा सकते हैं, असल में करीब से देखने के मौके बहुत कम मिलते हैं।
खासकर वे दुर्लभ कलेक्टर आइटम, जो निजी संग्रहों में बंद रहते हैं—वे तो बड़े-बड़े म्यूज़ियम में भी नहीं मिलते।
रोनाल्ड जानता था कि एडलिन ऐसे लालच का विरोध नहीं कर पाएगी।
जब वे नीलामी-घर पहुँचे, तो शुरू होने में अभी दस मिनट बाकी थे।
रोनाल्ड को सामने वाली कतार में वीआईपी सीट दिखाई गई।
वह अंदर कदम रखते ही, लोग उठकर उसका स्वागत करने लगे।
देश के सबसे बड़े ज्वेलरी ब्रांड के वारिस के तौर पर रोनाल्ड का रुतबा छिप ही नहीं सकता था।
और सबकी नज़र स्वाभाविक तौर पर उसके साथ बैठी महिला पर जा टिकी।
लड़की उम्र में छोटी और तरोताज़ा लग रही थी, उसमें एक ऐसा नैसर्गिक आकर्षण था जिसे शब्दों में बाँधना मुश्किल था।
कई सालों से रोनाल्ड के साथ उसकी सेक्रेटरी शर्ली वॉकर रहती आई थी। यह पहली बार था जब वह किसी नए व्यक्ति को साथ लाया था।
कई लोगों ने अनुमान लगाया था कि रोनाल्ड की ज़िंदगी में कोई और औरत न होने के कारण शायद आगे चलकर शर्ली ही “मिसेज़ विलियम्स” बनेगी।
लेकिन अब, जब वह किसी और को लेकर आया था—और खासकर एडलिन जैसे खूबसूरत चेहरे वाली किसी को—तो लोग उसकी पहचान को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाने लगे।
रोनाल्ड के बगल में बैठे एक अधेड़ उम्र के आदमी ने खुशदिल मुस्कान के साथ खड़े होकर उसका हाथ मिलाया। “मिस्टर विलियम्स, आज इतने देर से? कहीं आप इस खूबसूरत युवती को साथ लाने में व्यस्त थे क्या?”
“उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। हम अस्पताल रुक गए थे।”
रोनाल्ड के ये कहते ही, भीड़ में जैसे हैरानी की लहर दौड़ गई।
ज्वेलरी की दुनिया का वह कारोबारी दिग्गज—जिसकी कामयाबी ज़्यादातर लोगों की पहुँच से बाहर थी—जो किसी के प्रति गर्मजोशी नहीं दिखाता था, वह सच में एक जवान लड़की की सेहत की परवाह करे और खुद उसे अस्पताल तक लेकर जाए?
अपने चारों ओर उठती जिज्ञासु निगाहों को महसूस कर एडलिन के सिर की त्वचा में झनझनाहट-सी होने लगी।
उसका दिमाग तेजी से दौड़ा, फिर उसने एक वजह गढ़ ली। “जी, मिस्टर विलियम्स अपने स्टाफ का बहुत खयाल रखते हैं। उन्हें चिंता थी कि मैं अपने काम की ज़िम्मेदारी ठीक से निभा पाऊँगी या नहीं।”
“स्टाफ?” उस अधेड़ आदमी ने पलकें झपकाईं।
एडलिन ने तुरंत सिर हिलाया। “मैं मिस्टर विलियम्स की सेक्रेटरी हूँ—एडलिन।”
अधेड़ आदमी समझदारी भरी आवाज़ में बोला, “अच्छा, इसलिए शर्ली नहीं दिखीं। तो बदलाव हो गया है।”
उसने रोनाल्ड को एक अर्थपूर्ण नज़र से देखा, फिर निगाह एडलिन पर टिकाई।
रोनाल्ड ने बेपरवाही से अपना शरीर थोड़ा सा खिसकाकर उस आदमी की नज़र का रास्ता रोक दिया।
एडलिन ने मुट्ठियाँ भींच लीं, चेहरा निर्विकार रखकर एक प्रोफेशनल सेक्रेटरी का मुखौटा बनाए रखने की जद्दोजहद करती रही।
लेकिन अंदर ही अंदर वह रो रही थी। अभी-अभी तो उसने कहा था कि उसे सेक्रेटरी नहीं बनना—और अब उसने खुद ही मान लिया था। अब शायद पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था।
आसपास बैठे लोगों को देखकर—या तो ज्वेलरी इंडस्ट्री के बड़े-बड़े खिलाड़ी थे, या नामी घरानों के प्रतिनिधि—उसे एहसास हुआ कि अगर उसने रोनाल्ड को नाराज़ कर दिया, तो शायद उसे पेट पालने के लिए कहीं डिलीवरी का काम करना पड़े।
अपने फीके भविष्य की कल्पना करते हुए, एडलिन एक मशीन की तरह रोनाल्ड के पास बैठ गई—उसके ऊपर उदासी का बादल छाया हुआ था।
मगर नीलामी शुरू होते ही उसके भीतर जान लौट आई।
यह नीलामी खास तौर पर दुर्लभ ज्वेलरी पीसों की थी, और हर एक बेमिसाल।
वह पहले भी नीलामियों में जा चुकी थी, लेकिन एक ही जगह इतने सारे वर्ल्ड-क्लास, टॉप-टियर ज्वेलरी पीस उसने कभी नहीं देखे थे।
पहले तीन आइटम तो मानो राष्ट्रीय धरोहर के स्तर के थे, और उसकी धड़कनें जोश से तेज़ हो गईं।
वह हर आइटम को देखते-देखते अपनी नोटबुक में जल्दी-जल्दी डिज़ाइन के कच्चे स्केच बनाने लगी।
यह उसकी बरसों पुरानी आदत थी।
जब भी उसे कोई प्रेरक काम दिखता या कोई रचनात्मक विचार आता, वह उसे अपनी उस नोटबुक में उतार देती जिसे वह हर जगह साथ रखती थी।
प्रेरणा पल भर की होती है, और वह कभी मौका नहीं गँवाती थी।
उसकी नोटबुक पर रोनाल्ड की नज़र पड़ी तो वह हल्के से हँसा। “बाद में बैकस्टेज जाकर पास से देखना चाहोगी?”
"सच में?" एडेलीन की आवाज़ उत्साह से ऊँची हो गई, और आसपास बैठे कई लोगों की नज़रें उनकी ओर उठ गईं।
रोनाल्ड ने उसे तसल्ली भरी मुस्कान के साथ सिर हिलाकर देखा, फिर मंच पर रखी चीज़ पर ध्यान लौटाया, एडेलीन का हाथ थामकर उसे ऊपर उठा दिया।
"बिडर नंबर 01, पचास लाख!"
एडेलीन चौंक गई और प्रदर्शन पर रखी अंगूठियों की जोड़ी को देखने लगी। वह फौरन अपने काम वाले मोड में लौट आई—यह वही लक्ष्य वस्तुओं में से एक थी जिसका ज़िक्र रोनाल्ड ने पहले किया था।
आखिर में, जिन अंगूठियों की कीमत शुरू में पचास से साठ लाख आँकी गई थी, उनकी बोली बढ़ते-बढ़ते एक करोड़ तक पहुँच गई, और एडेलीन के हाथ काँपने लगे जब उसने बोली का पैडल उठाए रखा।
रोनाल्ड ने शांत भाव से वह कीमत स्वीकार कर ली।
एडेलीन का उतरा हुआ चेहरा देखकर उसने मज़ाकिया लहजे में पूछा, "तुम्हें लगता है इनकी कीमत नहीं बनती?"
"ऐसा नहीं है।" उसने चुपके से रोनाल्ड के पास बैठे उस अधेड़ आदमी को घूरा।
अगर वह मोटा आदमी दाम न चढ़ाता, तो छह लाख… नहीं, साठ लाख में ही सौदा हो जाता।
उसकी शक्ल देखकर रोनाल्ड की आँखों में शरारत और गहरी हो गई। "इन अंगूठियों का कोई खास मतलब है, है न?"
"बिल्कुल। मैंने सुना है, इन्हें खुद एक यूरोपीय राजा ने बनवाया था। एक बार पहन लीं तो निकलती ही नहीं," अधेड़ आदमी बीच में बोल पड़ा। "मेरी पत्नी इन्हें आज़माना चाहती थी, लेकिन मिस्टर विलियम्स की ज़िद देखकर मुझे पीछे हटना पड़ा।"
एडेलीन ने अंगूठियों को ध्यान से देखा। उल्टे ‘V’ जैसा डिज़ाइन खूबसूरत और अलग था, मगर उसे कोई ऐसा तंत्र नज़र नहीं आया जो इन्हें निकालने से रोकता हो।
यह सोचकर कि इन्हें उतारा नहीं जा सकता, उसकी आँखें अचानक फैल गईं। "रुकिए… कहीं ये किसी कब्र से लूटी हुई तो नहीं हैं?"
वरना ऐसी अंगूठियाँ नीलामी में कैसे आ सकती थीं?
कहीं रानी के मरने के बाद उसकी उँगलियाँ…?
उस खौफनाक खयाल से एडेलीन सिहर गई।
अधेड़ आदमी निरुत्तर रह गया, जबकि रोनाल्ड ने भावहीन नज़र से मंच की ओर देखा। "अगली वस्तु पर ध्यान दो।"
एडेलीन ने उसकी नाराज़गी भाँप ली और तुरंत चुप हो गई, हालांकि उसे हल्का-सा सुकून भी हुआ।
एक सीईओ को ठंडा-सा ही रहना चाहिए—अगर उसका बॉस दिन भर उसे देखकर मुस्कुराता रहे, तो वह डरावना लगेगा।
खुशकिस्मती से, इसके बाद की चीज़ों पर मुकाबला इतना तीखा नहीं रहा, और एडेलीन ने अपना काम ठीक से निभा लिया।
जल्द ही अंतिम और सबसे बड़ी पेशकश का वक्त आ गया: ‘नेब्युला का दिल’।
"मुझे यकीन है, यहाँ मौजूद आधे से ज़्यादा लोग ‘नेब्युला का दिल’ के लिए ही आए हैं, जो आज की हमारी आखिरी वस्तु है।"
होस्ट की आवाज़ गूँजी तो माहौल पल भर में तना हुआ हो गया।
डिस्प्ले प्लेटफॉर्म धीरे-धीरे ऊपर उठा, और ‘नेब्युला का दिल’ सबके सामने आ गया।
एडेलीन की आँखें चौड़ी हो गईं—वह कोई भी बारीकी चूकना नहीं चाहती थी।
हार के बीचोंबीच एक विशाल नीलम जड़ा था, और उसके चारों तरफ रंग-बिरंगे हीरे इस तरह सजाए गए थे कि पूरी आकाशगंगा का आभास होता था।
रोशनी में हर हीरा अपनी अलग चमक बिखेर रहा था।
यह ऐसा असर था जिसे कोई ऑनलाइन फोटो या वीडियो पकड़ नहीं सकता। पहली पंक्ति में बैठकर उस नायाब हार को देखते हुए एडेलीन की आँखों की चमक और बढ़ गई।
अपनी साँसें तेज़ होती महसूस करते ही रोनाल्ड का ध्यान पिछली रात की ओर भटक गया—एक नाज़ुक-से निर्णायक पल में उसने ठीक इसी तरह साँसें ली थीं।
धीमी, मन को खींच लेने वाली साँसें, जो उसके दिल की धड़कन बढ़ा देती थीं।
"इस हार की शुरुआती बोली आठ करोड़!"
होस्ट के वाक्य पूरा करते ही पूरे हॉल में आवाज़ें फूट पड़ीं।
जब बोली दस करोड़ तक पहुँची, एडेलीन ने घबराकर रोनाल्ड की तरफ देखा।
"मिस्टर विलियम्स, हम आगे बढ़ रहे हैं?"
उसे रोनाल्ड की सीमा नहीं पता थी—बस उसके होंठ एक पतली रेखा में भींचे हुए दिख रहे थे।
जब कीमत तीस करोड़ तक चढ़ गई, रोनाल्ड ने एडेलीन का हाथ थामा और उसे धीरे-धीरे ऊपर उठा दिया।
"पचास करोड़।"
पूरा हॉल हैरानी से उसे देखने लगा, एडेलीन भी—जिसके हाथ में अभी भी पैडल उठा हुआ था।
उसने झट से हाथ नीचे कर लिया, उसका दिल जैसे सीने से बाहर कूदने को था।
पचास करोड़?
ऐसी कीमत जिसका सपना भी वह करने की हिम्मत नहीं करती थी!
रोनाल्ड अचानक उसके कान के पास झुका और धीमे से फुसफुसाया, "ये तोहफ़ा तुम्हें पसंद आया?"
